मोहिनी वशीकरण विधा‘ वह क्रिया हैं जिसके द्वारा अवचेतन को शक्तिशाली बनाकर चेतन को सुप्त कर दिया जाता हैं।दूसरे शब्दों में यह ‘मोहे ‘ या आकर्षण की शक्ति हैं ।प्रयोगकर्ता यह क्रिया अपने मन की प्रबल शक्ति के बल पर करता हैं ।उसके शरीर की ऊर्जा तरंगे सामने वाले को प्रभावित करती हैं ।इससे उसकी चेतना  लुप्त हों जाती हैं  तथा उसका अवचेतन प्रबल हों जाता हैं ।प्रत्येक मनुष्ये में ऊर्जा होती हैं ।ऊर्जा से विधुत बनती हैं ।विधुत की तरंगे अपना प्रभाव डालती हैं ।जिस प्रकार रेडियो  स्टेशन से तरंगे बिखरती हैं और विशेष यंत्रो के कारन रेडियो साइट उन्हें ग्रहण केर लेता हैं ,उसी प्रकार मनुष्य के शरीर से भी ऊर्जा तरंगे निकलती हैं जो इच्छित वास्तु या पात्र से टकराकर उस पर अपना कार्य करती हैं।इस प्रकार मनुष्य के शरीर से एक विशिष्ट गंध निकलती हैं ।यह भी अपना कार्य करती हैं ।इस प्रकार मनुष्ये के शरीर से निकली ऊर्जा तथा ऊर्जा से उत्पन्न विधुत तरंगे गंध विशेष से मिश्रित होकर मनुष्य प्रभाव डालती हैं ।यह प्रभाव कितना और कहा  तक  होता हैं ,यह मन की शक्ति पर निर्भर करता  हैं ।मोहिनी या हिप्नोटिजम के लिए सबसे बड़ी आवशयकता मन  की इच्छाशक्ति अर्थात आत्मबल की होती हैं ।यह हिप्नोटिजम का अनिवार्य माध्यम हैं । अतः मोहिनी  विधा सिखने वालो के लिए सर्वप्रथम आवशयकता यह हैं की वह मन शक्ति बढ़ाए।इच्छाशक्ति ,आत्मबल या संकल्प में द्रढ़ता लाए ।मन की शक्ति जितनी सशक्त  होगी अर्थात जितनी इच्छाशक्ति जितनी प्रबल  होगी ,उतना ही शीघ्र  सम्मोहन हों सकता हैं।इसलिए अपने मन की अलौकिक शक्तियों को प्रबल बनाना होगा की वे पात्र या वस्तु की मन शक्ति से अधिक शक्तिशाली हों जाये अर्थात उस पर पूर्णतः हावी हों जाए ।जब इस प्रकार की विजय  स्थापनानहीं होगी तब तक पात्र या इच्छित वस्तु को ‘हिप्नोटिजम ‘नहीं किया जा सकता । दुसरो के मन में अपना पूरा नियंत्रण करना ‘मोहन’ कहलाता हैं ।इसका अपना एक वैज्ञानिक आधार हैं ।अब यहां दो प्रश्न महत्वपूर्ण हैं –पहला’ मन’ क्या हैं दूसरा ‘विचार’ क्या हैं ?मन मनुष्य के शरीर की नीरक्षीर क्रिया हैं यन्त्र का नाम हैं।जिस प्रकार हंस दूध का दूध और पानी का पानी अलग केर देता हैं उसी प्रकार मन विचारो का मंथन करता हैं क्या करना हैं और क्या नहीं करना हैं इसके पश्चात् वह अपना निर्णय मस्तिष्क की देता हैं
विचार मस्तिष्क में उपजी इच्छाओ और तरंगो का नाम हैं ।विचार इन्द्रियों को प्रभावित करते हैं और मन से टकराकर निर्णय ग्रहण करते हैं ।तब हम उसको कार्य रूप में परिणत करते हैं ।एक उदहारण से यह बात स्पष्ट  हों जायगी । की मस्तिष्क एक इच्छा तरंग निकलती हैं की राम से रुपया लेना हैं ।वह  विचार मन से टकराया ,मन निर्णय देता हैं की ठीक हैं ।तब यह सूचना मस्तिष्क को मिलती हैं ।तब  मस्तिष्क यह काम इन्द्रियों को सौप देता हैं और हमारे कदम राम से मिलने चल पड़ते हैं ।
इसप्रकार मस्तिष्क के माध्यम से पात्र के मन ,विचार और मस्तिष्क पर अधिकार करना ही ‘मोहन कहलाता हैं ।जिस प्रकार विज्ञापन के माध्यम से निर्माता ग्राहक को ‘मोहित’ करके अपनी बिक्री बढ़ा लेते हैं ,उसी प्रकार आपको अपने विचारो की शक्ति से इच्छित पात्र को प्रभावित और आकर्षित करना होता हैं ।
अस्तु ,अपनी विचारशक्ति और इच्छाशक्ति को बढ़ाना ‘मोहिनीविधा’ या ‘हिप्नोटिजम’ सिखने के लिए पहला कदम हैं । इसका अभ्यास इस प्रकार करे —
किसी परिचित या मित्र का बार-बार नाम ले और आंख बन करके पलकों तले उसका चित्र उतारने  की कोशिश करे ।यथा -वह इस प्रकार के  कपडे पहने हैं उसके बाल इस प्रकार हैं ।आंखे ,नाक ,चेहरा और मुँह इस प्रकार का हैं आप पूरी  एकाग्रता के साथ चिंतन करेंगे तो मित्र का चित्र अपने आप बन जाएगा । लेकिन प्रारम्भ में होता यह हैं की आपने आंखे बंद करली,शरीर ढीला करके लेट-बैठ गए और सोचना शुरू कर  दिया परन्तु कुछ ही  पलो बाद आपका मन अन्यंत्र भटक गया । बस इसी पर आपको नियंत्रण करना हैं इस प्रकार निरंतर अभ्यास और प्रयत्न दवारा पलकों तले चित्र उतारे ।चित्र क्या हैं ?जब निंद्रा में ऐसा हों सकता हैं तो क्या जाग्रतवस्था में आप पलके बंद करके ऐसा नहीं केर सकते ?जब आप ऐसा करने में समर्थ हों जायेंगे तो निश्चित रूप से ‘हिप्नोटिजम ‘ करने में सफलता प्राप्त कर  लेंगे। इस प्रकार का प्रारम्भिक अभ्यास आपके लिए आवयशक हैं ।शुरू में थोड़ी सफलता मिलेगी परन्तु बार-बार कोशिश करते जाइये ,आप पूर्णतः सफल होंगे ।इस क्रिया के अलावा आपको अपना स्वास्थ को भी देखना होगा ।खान -पान अनुकूल रखना होगा नाना प्रकार के व्यसनों से आपको  अपनी रक्षा करनी होगी मन में सात्विक  विचार रखने होंगे ।स्मरण रखिये ,गन्दी भावनाय या विचार आपके मन को एक दम क्षीण कर देते  हैं ।स्वस्थ तन में ही स्वस्थ  मन का वास  होता हैं ।आपका रंग-रूप चेहरा केसा भी हों ,सबसे पहले सात्विक भोजन ,सुविचार एवं आकर्षक व्यावहार के द्वारा अपना व्यक्तित्व उभारे मोहिनी विधा में इसकी भी परम आवयशकता हैं। इसके अलावा आपके लिए तनाव हानिकारक   हैं ।अस्वस्थ दशा में कभी ‘;समोहन ‘न करे प्रथम तो आप कर   ही नहीं पायेंगे और जैसे तैसे कर भी लिया तो अनर्थ हों सकता हैं पूर्ण स्वतः मन और पूर्ण स्वस्थ शरीर इस जटिल कार्य के लिए अतिआवयशक हैं ।
मोहिनी विधा में पारंगत होने के लिए कुछ अन्य बाते अनिवार्य हैं ।अधिक क्रोध करने वाला ,हर कार्य में शीघ्रता करने वाला  ,फालतु बोलने वाला कभी हिप्नोटिजम नहीं केर सकता इन सभी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण करने के बाद मन पर नियंत्रण करने के बाद मन पर नियंत्रण कर । जितना आप मन  पर नियंत्रण कार लेंगे उतना ही समोहन करना आसान होगा ।जब उपरोक्त विधि के अनुसार ,आप अपनी आंखे बंद करके इच्छित व्यक्ति या आकर बनाने में समर्थ हों जायेंगे।तो इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं की आप प्रथम चरण सिद्ध कर चुके हैं ।आप मोहिनी विधाा का सफल प्रयोग कर सकते हैं